भारत में कोरोना प्रभाव केंद्र सरकार ब्यस्त राज्य सरकारें पस्त राज्य की तिजोरियां हो रही खाली : नन्द किशोर जोशी

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आज सारा भारत लोकडाउन के दौर से गुजर रहा है.विश्व का भी यही हाल है. जिधर देखो कोरोना महामारी के बीच अफरातफरी मची हुई है.हाहाकार दुनिया भर में मचा हुआ है.

हमारे देश में राज्य सरकारों की हालात बहुत खराब है. जगह जगह कोविद 19 के लिए नये नये अस्पताल खोलने पडे, युद्ध स्तर पर काम करके. टेस्टिंग किट की ब्यवस्था करना, हजारों की टेस्टिंग करना और फिर संगरोध में संदिग्धों को रख चिकित्सा, दवा, भोजन की ब्यवसथा करना एक बडा ही जोखिम भरा कार्य है.

इन सब कामों के पीछे अत्यधिक ब्ययभार राज्यों को उठाना पड रहा है.इन के अलावा पुलिस बल की तैनाती, उनके भोजन की ब्यवसथा भी कोई छोटा मोटा काम नहीं है.

अब तक मैंने ब्यय की बात की.अब मैं राज्य सरकारों की आय के स्त्रोत की बात कर रहा हूँ.जबसे जिएसटी आया है देश में तब से केवल तीन चीज ही ऐसी है ,जिस पर राज्य सरकारों को टैक्स लगाने की अपनी तरफ से
छूट है.ये तीन चीजें हैं पेट्रोल डिजेल, शराब और जमीन खरीद बिक्री पर रजिस्ट्रेशन .

संयोग से तीनों ही वस्तुओं का कारोबार अभी लोकडाउन समय में नहीं के बराबर है. अर्थात राज्य
सरकारों की तीजोरियां खाली है. अब आरहा हूँ जिएसटी की आय पर , लोकडाउन, शटडाउन में दुकानों पर तालाबंदी है, फैक्ट्रियों की हालात ऐसी ही है.बसों की बंदी, ट्रकों की बंदी का मतलब है रोडटैक्स वगैरह की बंदी.

सारे तरह के खर्च चल रहे हैं राज्य सरकारों के .आय के साधन सारे बंद हैं . ऐसे में तिजोरियां राज्य सरकारों की खाली ही रहेगी.

इन सारे एपिसोड में कुछ विशेष बातें यह है कि 1897 के एपिडेमिक कानून के तहत केंद्र सरकार को विशेष अधिकार इस समय मिले हुए हैं. इसके अलावा फिलहाल केंद्र सरकार के पास एक और मजबूत कानून है 2005 का,कांग्रेस के समय का, इस कानून का नाम है इंडिया
डिजास्टर मेनेंजमेंट . इस कानून के तहत भी केंद्र सरकार आज के दौर में राज्यों के मुकाबले काफी ताकतवर नजर आरही है.

ये सब बातें हमारे संघीय ढांचे के अनुकूल नहीं है,जहाँ केंद्र के सामने राज्य बौने नजर आते हैं. अर्थात जिस राज्य में भाजपा विरोधी सरकार है , उसकी बांहें केंद्र सरकार आराम से मोड सकती है और अनेकांश में मोडती भी है.

यह पूरे देश,राज्यों और पूरे गणतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है.

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